चाय- नाश्ते की दुकान से भागवती कहार बनी आत्मनिर्भर, अब हर महीने 20 हजार की स्थायी आमदनी
एनएसपीन्यूज। महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए राज्य एवं केन्द्र सरकार द्वारा कई जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से जिले की महिलाएं न केवल अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी बेहतर बना रही हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है नरसिंहपुर जिले के विकासखंड सांईखेड़ा की ग्राम पंचायत जमाड़ा की श्रीमती भागवती कहार की, जिन्होंने स्वसहायता समूह से जुड़कर मेहनत, आत्मविश्वास और योजनाओं के सहयोग से एक नई पहचान बनाई।
श्रीमती भागवती कहार बताती हैं कि पहले उनका परिवार पूरी तरह मजदूरी पर निर्भर था। पति भोजन बनाने का कार्य करते थे और उसी से घर का खर्च चलता था। समय के साथ परिवार की जरूरतें बढ़ीं, लेकिन आय में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। ऐसे में भागवती कहार ने भी मजदूरी करना शुरू किया, लेकिन यह काम न तो नियमित मिलता था और न ही स्थायी आय दे पाता था।
परिवार को बेहतर भविष्य देने की उम्मीद लेकर 12 दिसंबर 2015 को भागवती कहार ने वंदना स्वसहायता समूह से जुड़कर नई शुरुआत की। समूह के माध्यम से बचत और बैंक लिंकेज की सुविधा मिली और उन्हें 30 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। उन्होंने इस राशि से एक छोटी चाय-पान की दुकान शुरू की। शुरुआत छोटी थी, लेकिन हौसला बड़ा था। जल्द ही इस दुकान से 8 से 10 हजार रुपये मासिक आय होने लगी।
ऋण चुकाया, फिर लिया अगला लिंकेज और दुकान को बनाया आकर्षक
भागवती कहार ने कड़ी मेहनत करके 30 हजार रुपये का ऋण चुका दिया। इसके बाद उन्हें अगला बैंक लिंकेज मिला और उन्होंने 80 हजार रुपये का बैंक ऋण प्राप्त किया। इस धनराशि से उन्होंने दुकान का डेकोरेशन कराया, कुर्सी-टेबल की व्यवस्था की और दुकान को एक बेहतर स्वरूप दिया। व्यवसाय को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने चाय-पान के साथ चाय-नाश्ते का काम भी शुरू किया, जिससे ग्राहकों की संख्या में लगातार वृद्धि होने लगी। मेहनत और योजना का परिणाम यह हुआ कि आज उनकी दुकान से मासिक आमदनी बढ़कर लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है।
आज श्रीमती कहार स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। इस कार्य में उन्हें अपने पति का भी पूरा सहयोग मिला। मजदूरी पर निर्भर जीवन से आगे बढ़कर उन्होंने स्थिर और सम्मानजनक आजीविका स्थापित की है।उन्होंने कहा कि आजीविका मिशन ने मजदूरी से निकालकर खुद का व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया, जिससे उनके परिवार को नया जीवन मिला है।






